पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- जापान के प्रधानमंत्री ने 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के अवसर पर भारत की आधिकारिक यात्रा की।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम:
- आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणा : अर्धचालक, महत्त्वपूर्ण खनिज , सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा तथा औषधि क्षेत्र में परियोजना-आधारित सहयोग को बढ़ावा देने हेतु।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर संयुक्त वक्तव्य : द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक AI अनुसंधान एवं विकास साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। इसके अंतर्गत संपूर्ण AI प्रौद्योगिकी शृंखला को शामिल करते हुए एक रोडमैप तैयार किया गया तथा सुरक्षित, विश्वसनीय, समावेशी एवं मानव-केंद्रित AI को प्रोत्साहन दिया गया।
- ऊर्जा प्रत्यास्थता पर संयुक्त वक्तव्य: रणनीतिक कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम भंडारों में सहयोग को सुदृढ़ करने तथा समुद्री ऊर्जा परिवहन में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु।
- संयुक्त घोषणा: वर्ष 2027 को भारत-जापान साझा क्षितिज वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा, जो दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का स्मरण करेगा।
- भारत-जापान सहकारी बायोगैस फॉर ग्रोथ (CBG) पहल पर समझौता ज्ञापन (MoU): डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से भारत में 1,000 बायोगैस एवं जैविक उर्वरक संयंत्रों की स्थापना को समर्थन देने हेतु।
- भूविज्ञान एवं खनिज अन्वेषण पर MoU: तकनीकी आदान-प्रदान के माध्यम से महत्त्वपूर्ण खनिजों के अपस्ट्रीम अन्वेषण में सहयोग को प्रोत्साहन देने हेतु।
- नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप (NGMP) पर MoU: रेलवे, ऑटोमोबाइल, सड़क, विमानन, जहाज निर्माण, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स तथा शहरी विकास में निजी क्षेत्र-आधारित सहयोग को गति देने हेतु।
- आईआईटी बॉम्बे, भारतजेन टेक्नोलॉजी फाउंडेशन तथा जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेटिक्स के मध्य MoU: वैज्ञानिक तर्क क्षमता पर केंद्रित बड़े भाषा मॉडल के संयुक्त विकास हेतु।
भारत-जापान संबंध : संक्षिप्त विवरण
- संबंधों की स्थापना: द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात भारत ने जापान के साथ पृथक शांति संधि करने का निर्णय लिया।
- वर्ष 1952 में इस संधि पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों के औपचारिक राजनयिक संबंधों की शुरुआत हुई।
- द्विपक्षीय संबंधों का विकास: वर्ष 2000 में संबंधों को वैश्विक साझेदारी का दर्जा प्राप्त हुआ।
- वर्ष 2006 में इन्हें रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी तक उन्नत किया गया।
- वर्ष 2014 में संबंधों को विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी का स्वरूप प्रदान किया गया।
- रणनीतिक समन्वय: भारत की एक्ट ईस्ट नीति एवं इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (IPOI), जापान की मुक्त एवं खुला इंडो-पैसिफिक (FOIP) नीति के साथ निकटता से सामंजस्यशील हैं।
- द्विपक्षीय व्यापार: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 27.47 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- जापान से भारत के आयात, भारत के निर्यात की तुलना में अधिक हैं।
- भारत के प्रमुख निर्यात: रसायन, वाहन, एल्युमिनियम एवं समुद्री खाद्य पदार्थ।
- प्रमुख आयात: मशीनरी, इस्पात, तांबा तथा परमाणु रिएक्टर एवं संबंधित उपकरण।
- वैश्विक पहलों में सहयोग: भारत एवं जापान अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) तथा लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (LeadIT) जैसी पहलों में सहयोग करते हैं।
- दोनों देश क्वाड (जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत-अमेरिका क्वाड) तथा भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया आपूर्ति शृंखला प्रत्यास्थता पहल (SCRI) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी मिलकर कार्य करते हैं।
- रक्षा एवं सुरक्षा: 2008 – सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा।
- 2014 – रक्षा सहयोग एवं आदान-प्रदान पर समझौता ज्ञापन।
- 2015 – सूचना संरक्षण समझौता।
- 2020 – पारस्परिक आपूर्ति एवं सेवाओं के प्रावधान संबंधी समझौता।
- 2024 – UNICORN नौसैनिक मस्तूल का संयुक्त विकास।
- सैन्य अभ्यास: मालाबार (अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया के साथ),
- मिलन (बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास),
- जिमेक्स (JIMEX) (द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास),
- धर्म गार्जियन (थल सेना अभ्यास),
- तटरक्षक बलों के मध्य नियमित सहयोगात्मक अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।
- वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के सैन्य प्रमुखों की पारस्परिक यात्राओं ने अंतरसंचालन क्षमता (Interoperability) को और सुदृढ़ किया।
- विकास एवं अवसंरचना सहयोग: वर्ष 1958 से जापान भारत का सबसे बड़ा आधिकारिक विकास सहायता (ODA) प्रदाता रहा है, जिसने आधारभूत संरचना एवं मानव विकास परियोजनाओं में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
- वर्ष 2023-24 में ODA का वितरण लगभग 580 अरब जापानी येन (4.5 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा।
- मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल परियोजना उन्नत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं कौशल विकास का प्रमुख प्रतीकात्मक परियोजना है।
- निवेश: वर्ष 2024 तक जापान, 43.2 अरब अमेरिकी डॉलर के संचयी निवेश के साथ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का पाँचवाँ सबसे बड़ा स्रोत है।
- जापान ने निरंतर भारत को दीर्घकालिक निवेश के लिए सबसे आशाजनक गंतव्य माना है।
- अंतरिक्ष सहयोग: इसरो (ISRO) एवं जैक्सा (JAXA) एक्स-रे खगोल विज्ञान, उपग्रह नेविगेशन, चंद्र अन्वेषण तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय अंतरिक्ष एजेंसी मंच (APRSAF) में सहयोग करते हैं।
- वर्ष 2016 में दोनों देशों ने अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग एवं अन्वेषण हेतु सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए।
- पर्यटन: वर्ष 2023-24 को पर्यटन आदान-प्रदान वर्ष के रूप में मनाया गया, जिसकी थीम थी—“हिमालय को माउंट फ़ूजी से जोड़ना”।
- उभरते सहयोग के क्षेत्र: डिजिटल सहयोग (अर्धचालक, स्टार्टअप),
- स्वच्छ ऊर्जा,
- आपूर्ति शृंखला प्रत्यास्थता,
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता,
- कौशल विकास।
चिंता के क्षेत्र
- व्यापार असंतुलन: भारत-जापान व्यापार में उल्लेखनीय असंतुलन है, क्योंकि जापान का भारत को निर्यात, भारत के जापान को निर्यात से अधिक है।
- इस असंतुलन को कम करने के लिए अधिक संतुलित एवं पारस्परिक व्यापार की आवश्यकता है।
- भू-राजनीतिक तनाव: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे भारत-जापान संबंधों के समक्ष चुनौती प्रस्तुत करते हैं।
- इनसे निपटने के लिए संतुलित एवं सावधानीपूर्ण कूटनीतिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
- सांस्कृतिक एवं भाषाई बाधाएँ: सुदृढ़ संबंधों के बावजूद भाषा, संस्कृति एवं व्यावसायिक कार्यप्रणालियों में अंतर गहन एकीकरण में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- सीमित जन-से-जन संपर्क: दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क एवं आदान-प्रदान अभी भी अपेक्षाकृत सीमित है, जिससे पारस्परिक समझ का विस्तार प्रभावित होता है।
- अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ: भारत में अवसंरचना में सुधार के बावजूद कुछ क्षेत्रों में अभी भी बड़े पैमाने पर जापानी निवेश को प्रभावी ढंग से समर्थन देने हेतु पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है।
- भिन्न आर्थिक प्राथमिकताएँ: भारत तीव्र आर्थिक विकास पर अधिक बल देता है, जबकि जापान सतत विकास एवं उन्नत प्रौद्योगिकी पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान केंद्रित करता है, जिससे कभी-कभी प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई देता है।
आगे की राह
- व्यापार एवं निवेश का सुदृढ़ीकरण: भारत के जापान को निर्यात में वृद्धि कर व्यापार असंतुलन को कम करने तथा भारत के विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में जापानी निवेश को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाना चाहिए।
- जन-से-जन संपर्क वृद्धि: सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन तथा शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देकर पारस्परिक समझ को और गहरा किया जाना चाहिए।
- प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी: जापान की तकनीकी विशेषज्ञता तथा भारत के तीव्र गति से विकसित हो रहे डिजिटल क्षेत्र का लाभ उठाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा एवं अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग को और विस्तारित किया जाना चाहिए।
- पर्यावरणीय सहयोग को प्रोत्साहन: पर्यावरणीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन तथा आपदा प्रत्यास्थता के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ कर दोनों देशों के हरित ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
स्रोत: PIB
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